हिन्दी दर्द शायरी दिल का दर्द बयाँ करती हुई

हिन्दी दर्द शायरी दिल का दर्द बयाँ करती हुई

कुछ दर्द शायरी दिल से

मुझसे माँगेंगे वो सब मेरे गुनाहों का हिसाब
वो तो ख़ुद वो नहीं पहने हुए हैं एक नकाब
हम तो दे देंगे अपने हर किसी गुनाह का सिला
ख़ुदा परस्त जो बनते हैं वो क्या देंगे जवाब।

ज़माने भर के ग़म सह लूँ अगर मंज़िल पता हो
अंधेरों में भी मैं रह लूँ अगर मंज़िल पता हो
नतीजा सामने हो और मुझमें हौसला हो तो
तेज़ मौजों में भी बह लूँ अगर मंज़िल पता हो।

क्यों दर्द-ए-राह पर लिये जाते हो मुझे
क्यों रोज़ मेरे ज़ख़्म दिखाते हो मुझे
माना की एक बार एक भूल की मैंने
हर वक़्त क्यों एहसास दिलाते हो मुझे।

तूने इल्ज़ाम लगाया है शुक्रिया तेरा
हमारे दिल को दुखाया है शुक्रिया तेरा
हम को जीना है जिये जायेंगे हर हालत में
हौसला तूने बढ़ाया है शुक्रिया तेरा।

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